OTHER
Dussehra 2018: मैसूर दशहरा
Dussehra 2018: मैसूर दशहरा
Mysore Dasara Mysuru Dussehra festival : कर्नाटक के मैसूर में
दशहरा के अलग रंग
होते है। यहां दशहरा
बड़े ही
रॉयल और अनोखे
अंदाज में मनाया जाता
है। आइए तस्वीरों में
देखते हैं यहां के
अनोखे रंग।
कर्नाटक के मैसूर
में भी दशहरा
धूमधाम से और बिल्कुल अलग अंदाज
में मनाया जाता
है। | तस्वीर साभार: Twitter
नई दिल्ली: विजयादशमी या
दशहरा पूरे देश
में धूमधाम से
मनाया जाता है।
इस पर्व को देश के
लगभग सभी
हिस्से में धूमधाम
से मनाया जाता
है। जगह-जगह पर रामलीला
का मंचन होता
है और फिर रावण, कुंभकर्ण
और मेघनाथ के
पुतले के दहन के साथ
इसका समापन होता
है। कर्नाटक के
मैसूर में भी दशहरा धूमधाम
से
और बिल्कुल
अलग अंदाज में
मनाया जाता है।
इसे यहां के लोग नाद
हब्बा के नाम से भी
जानते हैं।
मैसूर दशहरा के
बिल्कुल अलग ही अंदाज है।
इतने राजसी और
ठाठ-बाट के साथ दशहरा
देश में सिर्फ
यही
मनाया जाता
है। इस दौरान
लोगों में जबरदस्त
उत्साह देखने को
मिलता है। एक तरफ देशभर
में नवरात्र
का सेलिब्रेशन
नौ दिनों तक
चलता है और फिर विजयादशमी
के दिन इसका
समापन होता है।
दूसरी तरफ मैसूर
में बिल्कुल अलग
अंदाज में विजयादशमी
का सेलिब्रेशन दस
दिनों तक मनाया
जाता है और
सभी दिन अलग अलग रंग
देखने को मिलते
हैं। पौराणिक मान्यताओं
के मुताबिक
मैसूर का
नाम महिषासुर के
नाम पर पड़ा जिसे दुर्गा
के एक रूप देवी चामुंडेश्वरी
ने मारा था।
मैसूर दशहरा के
दौरान मैसूर में
सड़कों पर अलग नजारा देखने
के मिलता है।
विजयदशमी
के दिन मैसूर
की सड़कों पर
विशाल जुलूस निकलता
है जिसमें हाथी
जैसे और ऊंट जैसे
जानवर भी
होते हैं।
इसमें सजे-धजे
हाथी के ऊपर एक हौदे
में चामुंडेश्वरी माता
की मूर्ति रखी
जाती है।
सबसे पहले इस
मूर्ति की पूजा मैसूर के
रॉयल कपल करते
हैं उसके बाद
दशहरे का
भव्य जुलूस निकाला
जाता है। दरअसल
यह मूर्ति सोने
की बनी होती
है साथ ही

No comments:
Post a Comment